पांडे जी का 'भैंसवाद'

बिचारी भैंस   

   भारी भरकम भोली भाली भैंसे भारत में
    बजवाती बंदरों से बीन बारी बारी हैं,
    सोयी साठ सालों से है सपन सुखी संजोये 
    दारुण दशा में दबी दीन सी दुखारी हैं,  
   ये दल लो वो दल लो या दल बदल भी लो
   जुगत जुगाड़ें जीतने वाली जी जारी हैं,
   माननीय बन्दर बोले ये बात बंदरों से 
   कल भी बिचारी थी ये आज भी बिचारी है....

विश्वसुन्दरी भैंस

यादव जी नाच रहे थे ख़ुशी में बांच रहे
जो भी आता बोलता यादव जी बधाई है
दो दो लड्डू मुंह में दबा के पांडे जी ने पूछा
क्या हुआ है यहाँ किस बात की मिठाई है
यादव जी ने कहा कि हुई प्रतियोगिता थी
अभी अभी अमरीका वालो ने कराई है
विश्वसुन्दरी होगी जो कम कपड़ो में होगी
भेज दिया ट्रॉफी मेरी भैंस ले के आई है


चुनाव चिन्ह  भैंस 

नेता जी चुनाव चिन्ह पा कर हुए थे खिन्न
बोले अफसर जी न शाप मुझे दीजिये
इंजन के जले हुए तेल सा मेरा विरोधी
मैं हूँ पेट्रोल जैसा ताप मुझे दीजिये
बड़ा हो मेरा निशान ऊँची रहे मेरी शान
कोई ऐसा चिन्ह छांट आप मुझे दीजिये
उसको गधा दिया है मैंने क्या बुरा किया है
मेंढक न लूँगा भैंस छाप मुझे दीजिये

भैंस की सवारी  

बढ़ रहा वैश्विक ताप पूरे विश्व में जी 
मानव प्रजाति हेतु चिंता हुई भारी है
गाड़ियों का धुंआ यहाँ कारण हुआ है बड़ा
क्षरण ओजोन की परत का भी जारी है 
पार्किंग की दुविधा या ध्वनि प्रदूषण हो
जिम्मेदारी आज ये हमारी है तुम्हारी है 
गाड़ियों को छोड़ो प्रकृति से नाता जोड़ लो जी 
    सबसे तो बढ़िया हाँ भैंस की सवारी है 

भैंस संरक्षण     

बाघ शेर हाथी गैंडे कहीं ना विलुप्त हो ये 
इनकी सुरक्षा हेतु आप आगे आइये 
दे रही है सरकार इनको संरक्षण जी 
आगे बढ़ हाथ सरकार का बंटाइये 
किन्तु इस अभियान में अवश्य रहे ध्यान 
जंगल के लिए नहीं गाँव को भुलाइये
दूध देती घास खाए पुचकारो पास आए
सबकी दुलारी भैंस को भी तो बचाइये 

निजीकरण


नेता जी ओ नेता जी देश में निजीकरण
का कोई अदभुद अलख जगाइए,
यू एस को शिक्षा स्वस्थ्य चीन को डाकुओं को
सोमालिया भेज कर ट्रेनिंग दिलाइये,
देश में गरीबों का खून चूसने के लिए
जापान से बोल एक यन्त्र बनवाइए,
संसद को फिर से गोरों के सुपुर्द कर
रानी के महल में जा हाज़री लगाइए ,

महिला सशक्तिकरण

जिसको तो पार करते ही जी बदल जाये,
किस्मत अपनी हाँ प्यार वही रेखा है ।
गोल गोल गोल बस लट्टू सा जी घूमना,
भाग्य का हमारे सच में जी यही लेखा है।
चिट्ठी है सुनीता की नेट पे अनीता बैठी,
मैसेज बबिता का फोन पे सुरेखा है।
नारी शक्तिशाली हुई बात ये प्रमाणित है,
आगे आगे छोरी पीछे छोरों को ही देखा है ।

ठेंगा वो भी डबल ! ! !

किसी फिल्म का संवाद याद आता है
'' वैसे तो इसे अंगूठा कहा जाता हैं लेकिन जब इसे यों दिखाया जाये (जैसे ऊपर दिख रहा है) तो इसे कहते हैं 'ठेंगा'......" और तब पंक्तिया ज़ेहन में आती हैं..........


फूट फूट रो रहे हैं लोग महंगाई की
मार से निढाल हुए हुए पूरे त्रस्त हैं
आटा दाल जैसे सोना चाँदी हुआ कैसे करें
घर का मैनेजमेंट सोच अस्त व्यस्त हैं
कान पे ना जूं भी रेंग रही सरकार के जी
खर्चा चला रहे जी लोग हो के पस्त हैं
दो दो ठेंगा दिखलाय के हैं मुस्का रही जी
जनता है झेल लेगी मैडम आश्वस्त हैं

कवि की पत्नी का दुःख ........

मेरे मोहल्ले में रहते हैं एक कवि

अद्भुत है जिनकी छवि

लिखते हैं गीत,ग़ज़ल,कथा,कविता और छंद
नाम है श्री मति राम चंद

बीते दिनों उनकी पत्नी से मिला जो थी उदास
मैंने कारण जानने का किया प्रयास

तो उन्होंने बताया

अब क्या बताऊँ भाई साहब कैसे दिन बिता रही हूँ
धोखे में इनसे शादी हो गयी अब पछता रही हूँ

अब परसों की ही बात ले लीजिये ना
मैंने आज तक इनको किसी भी कवि सम्मलेन में नहीं सुना
इस बात का ताना दे गए
और शाम को ज़बरदस्ती एक नयी साडी और अपनी कसम दे कर
एक कार्यक्रम में ले गए

और वहां तो इन्होने हद कर दी
संचालक ने जैसे ही इनका नाम लिया
ये दौड़ कर आये और खुद को माईक से बांध लिया

उसके बाद तो ये अपने सुर में आने लगे
श्रृंगार की कविता वीर रस में सुनाने लगे

और जब असल में इन्होने वीर रस की कविता सुनाई
तो एक श्रोता ने ताली बजाई , नीचे से आवाज लगाई

"कवि महोदय आपको बधाई है ! ,
क्या बढ़िया हास्य कविता सुनाई है "

अब जब इनको ताली मिल गयी जिसके बिलकुल आसार नहीं थे
फिर तो संचालक के नौ बार धन्यवाद कहने के बावजूद
ये माईक छोड़ने को तैयार नहीं थे

फिर किसी तरह एक एक्स्ट्रा प्रतीक चिह्न देने के बहाने
माईक इनसे छुड़ाया गया
इनको मंच के पीछे लाया गया

इनके लिए ख़ास चाय बनाई गयी
उसमे बेहोशी की दावा मिलाई गयी

इनकी बेहोशी की खबर पा कर सारे कवि जोश में आ गए
पर ये भी कम थोड़े हैं ??
कार्यक्रम दो दौर का होने की घोषणा सुनते ही होश में आ गए

फिर ज़बरदस्ती मंच पर चढ़ गए
लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही तीन छंद पढ़ गए

फिर इनको फ्री छोड़ सब चले गए
और अब ये सिर्फ दो लोगों के लिए गुनगुना रहे थे
मैं तो इनके कसम से बंधी थी , और जिसने इन्हें बधाई दी थी
उससे चाकू दिखा कर कविता सुना रहे थे

इनकी कविता सुन सुन कर मेरी तो ये हालत हो आयी है
जितनी केमिस्ट की दूकान में नहीं होंगी
उतनी तो मेरे पास सर दर्द की दवाई है

अब कल ही जब मैंने इनकी नयी कविता सुनने से इनकार कर दिया
तो ये मुझसे ऐंठ गए
उस धूल भरे अँधेरे स्टोर रूम में जा कर बैठ गए

और उन्हें बाहर निकालने की कोई तरकीब काम नहीं आयी
तो हमारे पडोसी शर्मा जी ने आवाज़ लगाई

"कवि महोदय ,
कहाँ धूल भरे अँधेरे स्टोर रूम में पहुँच गए ,
बाहर आइये वरना मोहल्ले में बिगड़ सकती है आपकी छवि"
तो इन्होने अन्दर से जवाब दिया
"भाई शर्मा जी.....जहाँ न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि"

मैं तो इनकी हरकतों से इतनी परेशान हो गयी हूँ
की अब जब भी कोई खुद को कवि बताता है
सुनते ही मेरा सौ ग्राम खून जल जाता है

मैं तो आपनी सारी खुन्नस उसपे डाल देती हूँ
उसको धक्के दे कर घर से बाहर निकाल देती हूँ
"वैसे भाई साहब आप क्या करते हैं" ??

मैंने कहा " जी म... म.... मैं तो बस कुछ नहीं
ऐसे ही समय काटता हूँ
लोगों के दुःख दर्द बांटता हूँ

सबकी टेंशन कम करने की कोशिश करता हूँ
अपने बारे में कभी और बताऊंगा , एक ज़रूरी काम याद आ गया
फिलहाल चलता हूँ .

किस्मत का फेर.....

चाल पड़ी टेढ़ी इनकी देखो किस्मत का फेर
साथ मुलायम का छूटा हुए अमर सिंह ढेर
हुए अमर सिंह ढेर की दिखती अब लाचारी
अपने पैरों पर कुल्हाड़ खुद ही दे मारी
घूम रहे अब यहाँ वहां पर कहाँ गले अब दाल
भईया मोदी के घर निकले देख समय की चाल

पुरुषों .... अपनी साख बचाओ ...........

कौन कहता है की ये मेल डोमिनेटेड सोसाईटी है ,

जहाँ मौजूद महिलाओं की इतनी सारी वेराईटी है,

उग्रवादी से लेकर मंत्री तक , अफसर से लेकर संत्री तक
हर जगह इनकी पैठ है
और सीधे सीधे कहें तो पुरुष प्रधान समाज में इनकी
प्रधानता की घुसपैठ है

लोग कहते हैं आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा
मिला कर चल रही हैं
पर एक बात सारे पुरुषों को खल रही है

की जो महिला दुर्गा और चंडी का रूप कही जाती है
अपने आप को कमज़ोर कहने पर गुर्राती है

अरे घर में जो हसबैंड के सर पे तबला बजती है
टिकेट की लाईन में , बस में , ट्रेन में
आते ही अबला हो जाती है

अरे भीड़ भाड़ वाले इलाके में तो इन्ही का डंका बजता है
ये तो शेरनी की तरह चलती हैं और आदमी मेमने की तरह बचता है

की अगर कही पास चला गया तो ये अनाप शनाप बोल के रो सकती हैं
और आस पास की पब्लिक इनकी मदद करने को फ्री में खड़ी हो सकती है

अरे ये क्या रोएंगी असल में इनके सामने पड़ते ही आदमी रोता है
क्योंकि अश्रु रुपी ब्रह्मास्त्र तो केवल इन्ही के पास होता है

ब्रह्मास्त्र इनकी आँखों में और अमोघास्त्र इनकी बातों में है

अजी हुजूर समाज को मारीये तीर
आजकल तो पूरी सरकार इन्ही के हाथों में है

पता नहीं ये बात हमारे समझ में क्यों नहीं आती है
की संख्या कम होने कारण ही ये हर जगह प्राथमिकता पाती हैं

पुरुष प्रधान समाज में पुरुष की प्रधानता का स्तम्भ हिल रहा है
अब तो और महिला आरक्षण के बारे में सुनने को मिल रहा है

अजी असली डोमिनेशन तो इनका है
चाहे जेब कतरनी हो या थाने में केस
फैशन हो या बोलीवुड में दमकता फेस
बिजनेस ,पालिटिक्स या आई टी है
और आप कहते हैं ये मेल डोमिनेटेड सोसाईटी है ?

तो भैया अपनी काबलियत अपनी बातों में होती है
अपनी प्रतिष्ठा अपने हाथों में होती है

तो अगर अपनी साख बचानी हो
तो मेरी बात पर गौर फरमाइए

इनकी संख्या में हो रही कमी की रोकथाम के लिए
कोई ठोस कदम उठाइए

वरना आपको एक दिन मेरी ये बात याद आयेगी
जब पुरुष प्रधान समाज में , पुरुष की प्रधानता
केवल संख्या के आधार पर रह जायेगी

धमाल है !

सुन्दर सुशील सुकुमारी है सुलोचना है,
सेठ साहूकार सोचे सॉलिड सी माल है
छोरे जी छिछोरे छल छदम छलावा बोलें,
कमल की कली की सी काया है कमाल है
नाक है नुकीली नाचते नयन है नशीले,
गोल गोल गोरे गोरे गदराए गाल है
है ज़रीन है ज़हर है ज़माल की ज़बल,
कहे धक् धक् धड़कन ये धमाल है

कहानी डर डर की .......

बीते दिनों मैं एक बारात में शामिल हो गया,

देर रात तक नाचा और अंत में थक कर सो गया,

जैसे ही सोया की मुझे सपना आया
और मैंने अपने आप को फिर से उसी बारात में पाया,

वही बैंड वही बाराती ये सब देख कर मैं भौचक्का था
अंतर बस इतना रहा की इस बार दुल्हे की जगह सेहरा मैंने सजा रखा था,

खैर, हम पहुँच चुके थे लड़की वालों के द्वार
जहाँ खूब हुआ हमारा स्वागत सत्कार,

फिर मुझे कुर्सी पर बैठाया गया
थोड़ी देर बाद लड़की को भी बुलाया गया,

उसके हाथों में हार देख कर मैं शर्म से लाल हो गया
और लोगों की तरह मैं सिर झुका कर मुस्कुराते हुए हलाल हो गया,

फिर विवाह संपन्न हुआ , हमे मिली बधाई
लड़की विदा हो कर मेरे घर आयी,

आते ही उसने जो अपना असली रंग दिखाया
उसे देख कर हमे भी पसीना आया,

अब वो घर के बड़ों के रहने का सलीका सिखाने लगी
चाय बनाने को कहा तो डिग्रीयां दिखाने लगी,

इस बात पर मैंने जैसे ही उसे समझाने की कोशिश की
वो अपने पूरे फॉर्म में आयी,
उल्टा मुझ पर ही गुर्राई

कहने लगी " तुम्हारी ये चाल मुझ पर नहीं चलेगी ,
तुम्हारी दाल मेरे आगे नहीं गलेगी

और अगर तुमने दुबारा अपना मुँह खोला
मुझे कोई भी काम करने को बोला

तो ये बात तुम्हे बताना अपना फ़र्ज़ मानती हूँ
की दहेज़ प्रताड़ना की सारी धाराएँ मैं अच्छी तरह जानती हूँ"

"तो अगर चैन से रहना चाहते हो तो सदा मानना मेरा कहना
ज़िन्दगी भर मेरे आगे हाथ जोड़े सिर झुकाए रहना"

"और अगर कभी भी मेरे सामने बनने की कोशिश की हीरो
तो नंबर लगा दूँगी वन डबल जीरो"

"और हम औरतें दो आंसू टपका के जो कह देती हैं
वो बन जाती है पत्थर की लकीर

बेटा केस लड़ते लड़ते बन जाओगे पूरे फ़कीर"
मैंने सोचा किस झमेले में पड़ गए,
पर मानने वाले कहाँ थे हम भी अड़ गए,

पर अगले ही पल उसने मुझे घायल कर दिया,
कुछ समझ पता उससे पहले ही उसने सौ नंबर डायल कर दिया,

पलक झपकते ही पुलिस आ गयी,
छापेमारी टीम की तरह पूरे घर पर छा गयी,

और इधर वो अपना बयान दर्ज कराने लगी,
दोनों आँखों से दो दो गैलन बहाने लगी,

कहने लगी " मेरी सास मुझ पर बेतहाशा जुल्म ढाती है
दिन भर काम करवाने के बाद रात भर पैर दबवाती है"

" और मुझे ये बड़े शर्म के साथ कहना पड़ता है
की अपने ससुर की नज़रों से मुझे बच के रहना पड़ता है "

"और मेरे पति !! इन्होने कल से ले कर आज तक मुझे पीटा है
पूरे घर में दस बार घसीटा है"

"मुझे मार डालने का इनका इरादा पक्का है
और मेरी जान बख्श देने के लिए इन सबने डिमांड एक लाख रुपये रखा है"

मैंने बताना चाहा की सच्चाई बिलकुल नहीं है इसकी बात में,
मगर उससे पहले ही हम पहुँच चुके थे हवालात में,

जहाँ मेरा ऐसा स्वागत हुआ की,
मेरे गोरे रंग में लाल-काले रंगों की रंगीनियाँ घुल गयीं,
अंग अंग में यूँ दर्द उठा की झटके से मेरी नींद खुल गयी,

फिर मैंने अपने दाँतों से अपनी ऊँगली को काटा,
अपने ही गाल पर जड़ दिया एक चांटा,

और अगले ही पल ये सोचते हुए अपना गाल सेंक रहा था,
की ये हकीकत में हुआ या वाकई मैं सपना देख रहा था,

फिर मुझे एहसास हुआ की शादी का जुआ न खेला हूँ न हारा हूँ,
हर एंगल से देख लीजिये अभी तक सौ परसेंट कुंवारा हूँ,

इस सपने के बाद हर कदम फूँक फूँक कर धरने लगा हूँ,
अजी शादी तो दूर शादी के नाम से भी डरने लगा हूँ ......

हर फ़िक्र को धुएं में उडाता चला गया .......



देख लो बाबा जी के हाथ में कमंडल है
कान में मोबाईल लगा के बतिया रहे
घर से जी निकले है दर्शन को प्रभु के
या कि दर्शन कर घर को है जा रहे
कैसे बने साधू बाबा देख लो जी आप ये
इशारों इशारों में है सबको बता रहे
ध्यान से कमंडल के ऊपर का सीन देखो
हर फ़िक्र को है ये धुएं में उड़ा रहे

मैं भूल नहीं सकता तुझको ..........

मैं भूल नहीं सकता तुझको हर बात तेरी है याद मुझे
फांस के अपने जाल में पूरा कर गयी तू बर्बाद मुझे
मैं भूल नहीं सकता तुझको हर बात तेरी है याद मुझे


१०वीं की इम्तिहान में तूने फूल फ़ेंक कर मारा था
देखा तेरी ओर उसी पल अपना दिल ये हारा था
तुरत बाद में तूने अपने बांयीं आँख भी मारी थी
तहस नहस हो गयी पूरी अरे मेरी जो तैयारी थी
तेरी ओर क्या देखा समझो भाग्य ही मेरा फूट गया
बस तुझ पर ध्यान रहा मेरा ओर पेपर पूरा छूट गया
फिर चारो ओर से मिल कर सबने मेरी बहुत खिंचाई की
टीचर ने भी छड़ी घुमा कर मेरी बहुत पिटाई की
मम्मी ने तो थप्पड़ मारा था पर पापा ने लात मुझे
मैं भूल नहीं सकता तुझको हर बात तेरी है याद मुझे

जैसे तैसे १०वीं का मैं ग्यारहवीं की ओर चला
फिर दो साल तक अपने बीच में प्रेम पत्र का दौर चला
पढता था विज्ञानं किन्तु मैं रूप में तेरे भटक गया
वही हुआ परिणाम की मैं इस बार भी फिर से लटक गया
इंजीनियर बनने का सपना मेरा चकना चूर हुआ
तेरे कारण ही बीए करने को मैं मजबूर हुआ
जब तक तेरे साथ रहा हाँ पग पग पर मैं छला गया
कहाँ छात्र विज्ञानं का था इतिहास भूगोल में चला गया
बीए कर के एमए कर के पीएचडी अब करता हूँ
जहाँ वेकेंसी मिलती है टीचर की फॉरम भरता हूँ
सहनी पड़ती है सबसे अब तानो की बरसात मुझे मुझे
मैं भूल नहीं सकता तुझको हर बात तेरी है याद मुझे

मेरे जीवन की पूरी हाँ दिशा को तूने मोड़ दिया
आम की भांति चूस के पूरा तूने मुझको छोड़ दिया
तेरे कारण ही तो अब मैं कंगाली में रहता हूँ
तू तो मौज उडाती है और मैं फांके सहता हूँ
तेरे कारण ही कुल्फी की डंडी सा अब दिखता हूँ
इस सदमे से कवि बन गया अब मैं कविता लिखता हूँ
मैं तुझको ह्रदय दिया ओर तूने हृदयाघात मुझे
मैं भूल नहीं सकता तुझको हर बात तेरी है याद मुझे .......

महंगाई की मार.....

दिखलायें हम पेट कहाँ से बोलो जी सरकार
पिचक के चिपका पीठ से खा महंगाई की मार
महंगाई की मार खोपड़ी चक्कर खावे
राशन ईंधन सपने में ही नज़र है आवे
बात करें कंट्रोल की मनमोहन मुस्काएं
आम आदमी को दिया ठेंगा बस दिखलाए

'पांडे' खडा बाज़ार में

सीधे पथ पर चल रहे देखो कैसी चाल
आज अभी इस डाल पर कल बैठे उस डाल
कल बैठे उस डाल हाथ में फूल थमाए
इत् उत देख रहे शायद दूजी मिल जाए
और छोरियों की भी 'पांडे' देख रहा चतुराई
करें मोहब्बत देख के बटुए की मोटाई


प्यार मोहब्बत का देखो हुआ है कैसा हाल
छोरा देखे छोरियां और छोरी देखे माल
छोरी देखे माल करे तब छोरे से पहचान
माल ख़तम फिर से दोनों बन जाते अनजान
'पांडे' देखे यहाँ नया व्यवसायिक बाज़ार
दिल भाड़े पर मिलता बिकता 'डिस्पोजेबल' प्यार ..

लोकतांत्रिक कर्म

ये अनोखा जॉब देखो साब का रुआब देखो
कंधे पे बिठाये हुए लिए जा रहा है वो
जो आदेश होगा उसे पालन तो करना है
जी हुज़ूर जी हुज़ूर किये जा रहा है वो
घोडा गधा समझ के भूल नहीं करना जी
सच्चा इंसान सेवा दिए जा रहा है वो
लोग हरिद्वार बस अस्थियाँ ही ले के जाते
देखो पूरा अफसर लिए जा रहा है वो

वैलेनटाईन डे बनाम राखी ....

कालेज में एक अति सुन्दर बाला को
देख प्रेम ने जी ले ली अंगडाई मेरे मन में ,
हर जगह वही दिखती थी मुझे रूप जैसे
बस गया था जी उसका मेरे नयन में
फूल देने गया ही था तभी देख लिया
उसके भाई ने जो था चौगुना मेरे वज़न में
ऐसी सेवा कि भाई ने कि ह्रदय कि प्रेम पीड़ा
फ़ैल चुकी है जी मेरे पूरे ही बदन में,


कैसे कैसे धोया उसके भाई ने क्या बताऊँ
दो का मुझको तो भैया चार दीखता है अब
हीरो कहते थे मुझे कालेज में पहले जो
कहते हैं बेचारा लाचार दीखता है अब
इश्कबाजी छोड़ी तबसे ये 'वैलेंटाइन डे'
फालतू फिजूल औ' बेकार दीखता है अब
जब भी बिउटीफुल कोई लड़की है दिखती तो
सीधे सीधे राखी का त्यौहार दीखता है अब

वेटिंग पी एम्



वेटिंग पी एम् कहलाये अडवानी श्रीमान
किंतु दिल में ही रहा उनका यह अरमान
उनका यह अरमान इक दफा पीएम् होलें
कुर्सी पा कर किस्मत का दरवाज़ा खोलें
'पांडे' देखे बिगड़ गयी सब उनकी सेटिंग
वेट ही करते रह गए अपने पीएम् वेटिंग  

कहानी में ट्विस्ट ......

दोस्तों , आज मैं आप लोगों को एक राज़ कि बात बताता हूँ ,
मुझे लव अफ्फैरेस से डर क्यों लगता है बिल्कुल अच्छी तरह समझाता हूँ।
जिन दिनों मैंने अपनी १२ वी की परीक्षा को पास किया था
उन्ही दिनों मैंने एक अत्याधुनिक बम टाइप लड़की को पटाने का प्रयास किया था
मुझे मालूम नही था कि इसके चलते कभी टीचर, कभी पुलिस और कभी पब्लिक मुझे कूटेगी
क्या पता था ये बम टाइप लड़की एक दिन मेरी ही किस्मत पे फूटेगी
खैर ये तो बाद कि बात थी ,मगर शुरूआती दौर में मेरी उसकी अच्छी खासी जान पहचान हो गयी ,
मैंने सोचा कि चलो अपनी राह अब और भी आसन हो गयी
पहले स्कूल में , फ़िर सड़कों पर , फ़िर पार्क में उससे घुमाने लगा
उस पर खर्च करने के लिए ट्यूशन के पैसे उडाने लगा
कभी मूंगफली , कभी आइस क्रीम और कभी पार्टी का नाम ले कर मुझे चकरा देती थी
ख़ुद तो खा लेती थी और मुझे बड़े प्रेम से मूगफली के छिलके ओर आइस क्रीम की डंडी पकड़ा देती थी
पर तब तक मैं अपने आप को न बेवकूफ न गधा समझता था
मेरे पैसों पर उसकी अय्याशी को उसकी एक अदा समझता था
पर इस अदा के चलते मैं दोस्तों के कर्जे ओर उधार में डूब गया
और तब मुझसे रहा नही गया , आखिरकार मैं पूरी तरह ऊब गया
और अंत में मैंने उस से कह दिया कि सुनो , मुझे तुमसे कुछ कहना है कि मैं तुमसे................
इतने में ही उसने मुझे टोक दिया
अपनी बात कहने लगी ओर मुझे रोक दिया ,
कहने लगी कि तुम्हे जो कहना हो बाद में कहना ,
वैलेंटाइन डे के दिन ज़रा फ्री तो रहना ।
उस दिन तुम्हे ज़रूर आना है ,
मुझे किसी को तुमसे मिलवाना है ।
इतना कह कर वो चली ,
पर मेरे दिल में मचा गयी खलबली ।
मैंने सोचा कि वो उस दिन मुझे प्रपोज करेगी
अपने माँ बाप के सामने मेरा नाम डिस्क्लोज करेगी
और उस दिन से उसे गिफ्ट देने के लिए पैसों के चक्कर में पड़ गया
सलीम कि तरह अपने पिताजी के सामने अड़ गया ,
कि मुझे पैसे दीजिये कि मेरे ऊपर उसके इश्क का भूत छाया है
आपको क्या पता कि वैलेंटाइन डे के दिन उसने ख़ुद मुझे बुलाया है
खैर मैंने जैसे तैसे दिन बिताया ,
आखिरकार वो क्लाइमेक्स वाला वैलेंटाइन डे भी आया
उस से मिलने को हो रहा था बैचैन बड़ा
कंट्रोल नही कर पाया सुबह ६ बजे ही उसके घर टपक पड़ा
और तब वो लेती हुई अंगडाई ,
अपने घर से बाहर आयी
उसे देखते ही मैं कूद पड़ा ,
मारे खुशी के उछालते हुए पूछ पड़ा
कि तुम मुझे क्या बताने वाली थी
किस से मिलवाने वाली थी ?
मुझे देखते ही वो चौंकी ,
चोर के ऊपर पुलिसिया कुत्ते कि तरह भौंकी
"अरे मिलना मिलाना छोड़ और भाग यहाँ से वरना मुश्किल बड़ी हो जायगी
तेरे साथ साथ मेरी भी खाट खड़ी हो जायगी"
"और छुपा दे जो तेरे हाथ में ये गिफ्ट है
थाने में पिताजी कि ड्यूटी आज मोर्निंग शिफ्ट है"
"वो कभी भी बाहर आयेंगे ,
और अगर तुझे यहाँ पाएंगे"
"तो तुम्हारे पिछवाडे ओर उनकी लात का कॉम्बिनेशन होगा
और तेरा अगला ठिकाना शहर का पुलिस स्टेशन होगा"
मैंने कहा "ठीक है मैं भागता हूँ , मगर ये तो बता कि क्या बताने वाली थी ,
किस से मिलवाने वाली थी "?
वो शर्मा के बोली कि "तुझे यही बताने वाली थी कि आज तक मैंने तुझसे जो कुछ भी पाया है ,
उन तोहफों का सही इस्तेमाल कर के एक स्मार्ट, हैंडसम ओर रईस लड़के को पटाया है"
"पर मैंने उसे बताया नहीं है ..
उसी से मिलवाले वाली थी
पर क्या है की सुबह बहुत है ना तो वो अभी आया नहीं है"
ये सुन कर मुझे झटका लगा , मेरा दिमाग फिसल गया ...
उधर उसका खडूस दरोगा बाप भी बाहर निकल गया .
मुझे सदमा लगा था इसलिए न हंसा न रोया था
मुझे तो ये भी याद नहीं की उसके बाप ने मुझे कब कहाँ और कितनी बार धोया था
अब किसी उजड़ी हुई रियासत के लुटे हुए सुलतान की तरह
फकीरों और भिखारियों के उभरते शान की तरह
मैं अपने घर की और चल पड़ा ....
ये सोचते हुए की मुझे कितने धोबी पछाड़ पड़े थे ..
उधर मेरे स्वागत में पिताजी पुराने जूतों का सेट ले कर बाहर ही खड़े थे....
फिर उन्होंने मेरा स्वागत सत्कार किया
एक नहीं कई बार किया
फिर इश्क के भूत ने मुझे छोड़ दिया और डर के भूत ने जकड़ लिया.....
मैंने भी अपना कान पकड़ लिया ......
अब तो सबको यही बताता हूँ
बार बार दोहराता हूँ ....
की ऐसी गलती ज़िन्दगी में पहली बार की मैंने,
अपने ही पैरों पर कुल्हाडी मार ली मैंने ,
और जबसे मिरिंडा की तरह जोर का झटका धीरे से खाया है,
छोड़ दी करनी बातें प्यार की मैंने ,
और अब जब भी किसी खूबसूरत लड़की को देखता हूँ
दिल में उठता है एक अजीब सा पेन ,
पर उधर सा आवाज आती है ,
आल द लाइन्स आफ दिस रूट आर बीजी प्लीज नेवर ट्राई अगेन...........